शिमला: मुख्य अभियंता विमल नेगी की मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट से चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी मृत्यु शव मिलने से करीब 5-6 दिन पहले, यानी 12 या 13 मार्च को हुई थी। विमल नेगी का शव 18 मार्च को बिलासपुर की गोबिंद सागर झील में मिला था, जबकि उन्हें आखिरी बार 10 मार्च को घुमारवीं में देखा गया था। अब सवाल उठ रहा है कि मौत से पहले के दो दिनों तक वह कहां थे?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या आया सामने?
एम्स बिलासपुर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट को पुलिस को सौंप दिया गया है। इसमें शरीर पर किसी भी तरह की चोट के निशान नहीं मिले हैं। हालांकि, बिसरा और अन्य रिपोर्ट्स अभी आना बाकी है, जिनके बाद ही मौत का सही कारण पता चल सकेगा। डीएसपी मुख्यालय मदन धीमान ने बताया कि रिपोर्ट के अनुसार, विमल की मौत शव मिलने से करीब पांच दिन पहले हुई थी, लेकिन मौत का कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है।
परिवार की मांग: सीबीआई जांच हो
विमल नेगी की मौत को लेकर उनके परिजन लगातार सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। शनिवार को नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर उनके पैतृक गांव कटगांव (किन्नौर) पहुंचे और परिजनों से मुलाकात कर संवेदना जताई। इस दौरान परिवार ने फिर से सीबीआई जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई। जयराम ठाकुर ने कहा, “विमल की मां, पत्नी और परिजनों का दर्द देखकर बहुत दुख हुआ। विमल एक ईमानदार और मिलनसार अधिकारी थे। उनकी मौत ने कई सवाल खड़े किए हैं।”
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने भी कहा कि यदि विमल ईमानदार न होते, तो पूरा विभाग उनके साथ खड़ा नहीं होता। उन्होंने भी मामले की सीबीआई जांच की मांग का समर्थन किया। इस मौके पर कई भाजपा नेता मौजूद रहे।
निलंबित अधिकारी को नहीं मिली जमानत
हिमाचल हाईकोर्ट ने विमल नेगी मौत मामले में निलंबित निदेशक देशराज की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है और अगली सुनवाई 24 मार्च को होगी। देशराज ने दावा किया कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर गलत है और गिरफ्तारी से बचने के लिए जमानत मांगी थी।
जांच में तेजी, SIT सक्रिय
विमल नेगी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में SIT ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने मोबाइल फोन, सीसीटीवी फुटेज और कंप्यूटर हार्ड डिस्क को फॉरेंसिक जांच के लिए एफएसएल जुन्गा भेजा है। साथ ही, पावर कॉरपोरेशन और सचिव पावर से रिकॉर्ड मांगा गया है। साइबर विशेषज्ञों की मदद से तकनीकी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।
विधानसभा में भी उठा मुद्दा
भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने विधानसभा में इस मामले को उठाते हुए कहा कि संबंधित वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ एफआईआर में नाम शामिल होना चाहिए था। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने इसे संज्ञान में लिया और सरकार को सूचित करने की बात कही। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई होगी।
विमल नेगी की मौत का रहस्य अभी भी बना हुआ है। आने वाली रिपोर्ट्स और जांच से ही इस मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।
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